भारतवर्ष आज भी विकासशील राष्ट्र है। यहाँ तक की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र मे भी लाखों युवक और युवतियां सामान्य शिक्षा या रोजगार परक हुनर से वंचित हैं।

ऐसा अनुमान है कि सन 2020 तक देश में लगभग 5 करोड़ युवा काम के उम्र में आ जाएंगे। कामगार युवा कि यह संख्या विश्व में सबसे अधिक भारत में होगी। आज के वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह समझ यह समझ में आता है की लगभग 80% युवाओं ने अपना स्कूल पूरा नहीं किया है| अगर इन युवाओं को किसी भी तरीके से कौशल शिक्षा दी जाए तो उन्हें रोजगार की संभावनाएं तलाश करने में आसानी हो सकती है।

अक्सर ऐसा देखा जा रहा है कि युवा वर्ग जिन्होंने शिक्षा नहीं हासिल की है वह अपनी रोजमर्रा के खर्चों के लिए बंधुआ मजदूरी जैसे कार्य में लग जाते हैं जिसकी वजह से उनका भविष्य और विकास रुक सा जाता है और उनके सोचने और समझने की शक्ति सीमित हो जाती है और सिर्फ वह मजदूर बनकर रह जाते हैं। अगर समय रहते इन युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा दे दी गई तो यह अपना तो विकास कर ही पाएंगे साथ ही देश के विकास में पूर्ण रुप से भागीदार बन पाएंगे।

शुभ लाभ सेवा संस्थान में हमने यह प्रण किया है कि हम इन युवाओं को शिक्षा का एक दूसरा अवसर प्रदान करेंगे ताकि वह अपने जीवन की लक्ष्य को पूरा कर पाए और एक बेहतर जिंदगी जी सकें। सबसे पहले हम सबसे पहले हम उन युवाओं का नामांकन करवाने का प्रयत्न कर रहे हैं जिन्हें समाज में सबसे निचले स्तर पर समझा जाता है इस प्रक्रिया के तहत हम उन युवाओं का भी चयन करेंगे जो नशे की लत और बुरी संगत की वजह से अपना समय और भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।

शुभ लाभ सेवा संस्थान के वॉलेंटियर्स दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के झुग्गी झोपड़ियों में जाकर युवा वर्ग से मिलने का मुहिम शुरू कर चुके हैं। शुभ लाभ सेवा संस्थान का यह भी लक्ष्य है कि हम भारत सरकार के पंचवर्षीय योजनाओं को भी अपने योजना में शामिल करें ताकि सिर्फ शहरी क्षेत्रों का ही विकास नहीं ग्रामीण क्षेत्रों और पिछड़े वर्ग के क्षेत्रों का भी विकास के बारे में प्रयास किया जा सके । शुभ लाभ सेवा संस्थान प्रेरित है अपने उस आंदोलन के लिए जो कि समाज के बेहतर रूप को बनाकर राष्ट्र की सेवा में समर्पित हो जाएं।

इस क्रम में हमने निम्नलिखित परिकल्पना की है:
1. दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में हम युवक और युवतियों को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करेंगे
2. उन युवाओं के लिए विशेष योजना बनाने के प्रयत्न में हैं जिन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी है और अपने जीवन यापन के लिए बंधुआ मजदूरी के लिए बाधित हैं।