एक अनुमान के अनुसार २०२० तक भारतवर्ष मे लगभग ५० करोड़ युवा होंगे जो अर्थवयव्था के कामगार वर्ग मे शामिल होंगे। इस तरह भारत विश्व मे सर्वाधिक कार्य संपन्न राष्ट् के रूप में उभर कर आएगा।

शुभ लाभ सेवा संस्थान संकल्पित है इस समस्त युवा वर्ग को रोजगार परक संभावनाएं प्रदान करने के लिए।

शुभ लाभ NGO के ट्रस्टी समाज के जाने-माने व्यापारी है यह समाज की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहें हैं और समाज की सेवा पिछले 20 वर्षों से करते आ रहे हैं। मदद चाहे किसी प्रकार की हो, आर्थिक सामाजिक या पारिश्रमिक वो कभी भी पीछे नहीं हटते। अब हम शुभ-लाभ NGO के माध्यम से को समाज के अन्य वर्गों को जनहित के लिए जोड़ना चाहते हैं।

शुभ लाभ NGO की स्थापना मुख्य तौर पर समाज के गरीब तबकों के मदद और आर्थिक कल्याण के लिए की गई है। जैसा कि हम सब जानते हैं दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में कई झुग्गी-झोपड़ियों हैं जहां की बड़ी संख्या में में लोग बहुत निम्न आय पर काम करते हैं उनकी कमाई अत्यंत ही कम है और वह किसी भी तरीके से अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते हैं। सामान्यतः यह लोग रिक्शा चलाते हैं ड्राइवर हैं घरों में काम करते हैं लेबर हैं या किसी भी रोजमर्रा के काम से जुड़े हुए हैं। इनका कोई अपना ना घर है ना ठोर ठिकाना है और ये लोग बस्तियों में रहते हैं और रोज के जीवन यापन के लिए संघर्ष करते हैं। हम शुभ लाभ NGO के माध्यम से इनके जीवन में सुधार के लिए प्रयत्न करेंगे और इन्हें इस बात के लिए भी प्रेरित करेंगे कि आसपास क्षेत्रों को भी अच्छा बनाएं और उसमें खुद रहें और दूसरों को रहने लायक बना पायें। बस्तियों में रहने वाले लोग सामान्यतः शिक्षित और सामाजिक उत्तरदायित्व वाले नहीं हैं और इतने भी सजग नहीं है कि अपने सामान्य आवष्यकताओं का देखरेख कर सकें। जैसे कि पानी का नल और आसपास के क्षेत्रों की सफाई, इसलिए हम उन लोगों को अच्छे जीवन के लिए भी के लिए प्रेरित करना चाहते हैं।

हम शुभ-लाभ NGO के माध्यम से समाज के अच्छे वर्ग के लोगों से यह अनुरोध करेंगे कि वह अपने कपड़े, किताबें, पेंसिल और अन्य वस्तुएं जो कि उनके उपयोग में नहीं है उसे दान करें। दान में मिला हुआ साजो-सामान हम बस्तियों के लोगों को दिया जाएगा और लेकिन वह मुफ्त नहीं होगा। पहले लोगों को प्रेरित किया जाएगा कि इन सामानों के बदले उन्हें अच्छे जीवन यापन की व्यवस्था करनी पड़ेगी और आसपास के क्षेत्रों को साफ रखना पड़ेगा और उसके बदले में उन्हें इनाम के तौर पर यह सब साजो सामान दिए जाएंगे ताकि उन्हें इस बात का एहसास हो कि यह उन्होंने अपनी मेहनत से कमाया है। हमने यह भी योजना बनाई है कि दान मे मिले हुए किताबों की हम लाइब्रेरी बनाएंगे और साथ में कंप्यूटर सेंटर भी तैयार करेंगे। साथ ही बच्चों को खेलने कूदने के सामान मुहैया कराए जाएंगे। इस तरह से बस्ती के लोगों को अपने सामाजिक जिम्मेदारी का अहसास होगा और वह समाज का हिस्सा बन पाएंगे।

छोटे बस्तियों के लोगों को हम धीरे-धीरे समाज में अच्छे आर्थिक स्तर पर रहने केलिए प्रेरित भी करेंगे हम उनके छोटे व्यापार के लिए आर्थिक सहायता मुहैया करवाएंगे ताकि वह अपने लिए ऑटो रिक्शा, हाथ गाड़ी इत्यादि खरीद सकें और अपने को बंधुआ मजदूरी से मुक्त करा पाएं। यहाँ तक कि हमने यह योजना बनाई है कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के युवाओं की शादियों में हम उनकी आर्थिक सहायता करेंगे जहां बैंक और आर्थिक संस्थाएं उनकी मदद बिल्कुल भी नहीं कर पाती और वह सेठ और साहूकारों से लोन या अधिक दर पर उधार लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं।

इसलिए हमने ये योजना भी बनाई है कि समाज में हम उचित दर पर लोन उपलब्ध कराएंगे और उन पैसों का उचित इस्तेमाल हो यह भी सुनिश्चित करेंगे। इस तरह से हमारा उद्देश्य होगा कि समाज को हम आर्थिक रुप से सुदृढ़ करें।

शुभ लाभ सेवा संस्थान के माध्यम से हम उन युवाओं को शिक्षा पाने का अवसर दुबारा देना चाहते है जो अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए।हमारा संकल्प एक बेहतर और शिक्षित समाज का निर्माण  है। हमने अपने बिभिन्न योजनाओ में ये सुनिश्चित किया है कि हम युवाओं को ऐसी पाठ्यकर्म मे नामांकन करवाएं जिसमे वो सामान्य शिक्षा ले कर रोजगार तलाशने के लिए परेशान न हो बल्कि वो अपने आप को इस तरह से तैयार करें की उनकी शिक्षा रोजगारपरक हो और वो खुद को समाज का भागीदार समझें।

युवा वर्ग देश के सच्चे कर्णधार है, जब तक हम उन युवाओं का सही मार्गदर्शन नहीं करेंगे जो उचित शिक्षा के अभाव मे अपने भविस्य का निर्धारण नहीं कर पा रहे है तब तक हम एक बेहतर समाज की परिकल्पना नहीं कर सकते।

भारत में आजीविका के लिए आबादी का एक बड़ा हिस्सा बिना किसी योजना के रोजगार मे लगा रहता है जो वस्तुतः उनके भविष्य के लिए किसी भी तरह से मददगार नहीं है।

सरकारी संगठनों द्वारा किया गया प्रयास काफी नहीं होता।हम दृढ़ता से मानते हैं कि देश की ताकत और भविष्य हमारे युवाओं के हाथों में है। विकसित देशों के विपरीत जहां 90% युवा कुछ या अनेक प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण का विकल्प चुनते हैं, इस तथ्य के बावजूद कि भारत सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है, हमारे देश में व्यावसायिक प्रशिक्षण वाले युवाओं की संख्या 5% से कम है।

इन सारे तथ्यों के मद्देनज़र शुभ लाभ सेवा संस्थान ने ये परिकल्पना की है की हम युवाओं को सामान रोजगार के अवसर प्रदान करने मे उनकी भरपूर सहायता करेंगे।

अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए हमने कुछ कार्यक्रम बनाये है :

1 . सबसे पहले हम उन युवाओं की शिक्षित करने का प्रयत्न करेंगे जो सिर्फ पढ़ लिख सकतें है लेकिन उनके पास किसी भी प्रकार का डिग्री नहीं है।
2 . व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देंगे जिसमे 70% व्यावहारिक और 30% सिद्धांत शिखा दी जा सके
3. कुछ विशेष तरह के पाठ्यकर्म का भी उपयोग किया जाएगा जिसमे अनुवांशिक परिवर्तन और निर्णय लेने, समय प्रबंधन, धन प्रबंधन, मूल्यों और धारणा, स्वास्थ्य और स्वच्छता, कार्य की तैयारी आदि जैसे जीवन कौशल मे निपुण किया जा सके।
4. इंग्लिश स्पीकिंग और कंप्यूटर की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
5. विभिन्न निजी संस्थांनों से जुड़ कर रोजगार की संभावनाएं तलाश कर की युवाओं को रोजगार पाने मे मदद की जाएगी.