नारी सशक्तिकरण : हालात कहां बदले हैं

साधारण शब्दों में महिलाओं के सशक्तिकरण का मतलब है कि महिलाओं को अपनी जिंदगी का फैसला करने की स्वतंत्रता देना या उनमें ऐसी क्षमताएं पैदा करना ताकि वे समाज में अपना सही स्थान स्थापित कर सकें।

महिला अपने आप में एक परिपूर्ण शब्द जो अपने भीतर बहुत कुछ छिपाये हुए है वो मां है वो बहन है वो बीबी है और क्याक्या है ये बताने की जरूरत नहीं, समाज में मजबूती से अपना योगदान देती महिलायें सब कुछ बगैर कहे ही बयां कर जाती हैंअपने आस पास के परिवेश को देखें घरेलू महिलाओं के साथसाथ पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम करतीं कामकाजी महिलायें ये समाज की कुछ ऐसी तस्वीरें हैं जिससे ना सिर्फ जिंदगी और उससे जुड़ी तमाम खुशियों में इज़ाफा होता रहता है बल्कि ये समाज ये संस्कृति भी कायम है।

नारी सशक्तिकरण के बिना मानवता का विकास अधूरा है। वैसे अब ये मुद्दा Women Development का नहीं रह गया, बल्कि Women-Led Development का है।

अब महिला उत्थान को महत्व का विषय मानते हुए कई प्रयास किए जा रहे हैं और पिछले कुछ वर्षों में महिला सशक्तिकरण के कार्यों में तेजी भी आई है। इन्हीं प्रयासों के कारण महिलाएं खुद को अब दकियानूसी जंजीरों से मुक्त करने की हिम्मत करने लगी हैं। सरकार महिला उत्थान के लिए नईनई योजनाएं बना रही हैं, कई एनजीओ भी महिलाओं के अधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद करने लगे हैं जिससे औरतें बिना किसी सहारे के हर चुनौती का सामना कर सकने के लिए तैयार हो सकती हैं।

आज की महिलाओं का काम केवल घरगृहस्थी संभालने तक ही सीमित नहीं है, वे अपनी उपस्थिति हर क्षेत्र में दर्ज करा रही हैं। बिजनेस हो या पारिवार महिलाओं ने साबित कर दिया है कि वे हर वह काम करके दिखा सकती हैं जो पुरुष समझते हैं कि वहां केवल उनका ही वर्चस्व है, अधिकार है।

जैसे ही उन्हें शिक्षा मिली, उनकी समझ में वृद्धि हुई। खुद को आत्मनिर्भर बनाने की सोच और इच्छा उत्पन्न हुई। शिक्षा मिल जाने से महिलाओं ने अपने पर विश्वास करना सीखा और घर के बाहर की दुनिया को जीत लेने का सपना बुन लिया और किसी हद तक पूरा भी कर लिया।

दुर्भाग्य की बात है कि नारी सशक्तिकरण की बातें और योजनाएं केवल शहरों तक ही सिमटकर रह गई हैं। एक ओर बड़े शहरों और मेट्रो सिटी में रहने वाली महिलाएं शिक्षित, आर्थिक रुप से स्वतंत्र, नई सोच वाली, ऊंचे पदों पर काम करने वाली महिलाएं हैं, जो पुरुषों के अत्याचारों को किसी भी रूप में सहन नहीं करना चाहतीं। वहीं दूसरी तरफ गांवों में रहने वाली महिलाएं हैं जो ना तो अपने अधिकारों को जानती हैं और ना ही उन्हें अपनाती हैं। वे अत्याचारों और सामाजिक बंधनों की इतनी आदी हो चुकी हैं की अब उन्हें वहां से निकलने में डर लगता है। वे उसी को अपनी नियति समझकर बैठ गई हैं।

अपनी निजी स्वतंत्रता और स्वयं के फैसले लेने के लिये महिलाओं को अधिकार देना ही महिला सशक्तिकरण है। परिवार और समाज की हदों को पीछे छोड़ने के द्वारा फैसले, अधिकार, विचार, दिमाग आदि सभी पहलुओं से महिलाओं को अधिकार देना उन्हें स्वतंत्र बनाने के लिये है। समाज में सभी क्षेत्रों में पुरुष और महिला दोनों को लिये बराबरी में लाना होगा । देश, समाज और परिवार के उज्जवल भविष्य के लिये महिला सशक्तिकरण बेहद जरुरी है।

शुभ लाभ NGO इस दिशा मे सतत कार्यरत है । हम कई माध्यमों से नारी सशक्तिकरण के लिए प्रयासरत है जिसमे कौशल विकास पर विशेष ध्यान है । आपका सहयोग इस लक्ष्य को प्राप्त करने मे हमारी मदद करेगा । कृपया आप अपनी सहयोग राशि का अनुदान करें ।