गरीबी उन्मूलन की दिशा में हम कहाँ खड़े हैं?

गरीबी को एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जिसमें व्यक्ति जीवन के निर्वाह के लिये बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ होता है। इन बुनियादी आवश्यकताओं में शामिल हैंभोजन, वस्त्र और घर। चरम गरीबी अंततः मृत्यु की ओर ले जाती है। भारत में उपभोग और आय दोनों के आधार पर गरीबी के स्तर का आकलन किया जाता है। उपभोग की गणना उस धन के आधार पर की जाती है जो एक परिवार द्वारा आवश्यक वस्तुओं पर खर्च किया जाता है और आय की गणना उस परिवार द्वारा अर्जित आय के अनुसार की जाती है।

अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, तेज़ी से आर्थिक विकास और सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के लिये प्रौद्योगिकी के उपयोग ने देश में चरम गरीबी को कम करने में मदद की है।

गरीबी दूर करने की नीति आयोग की रणनीति

  • 2017 में नीति आयोग ने गरीबी दूर करने हेतु एक विज़न डॉक्यूमेंट प्रस्तावित किया था। इसमें 2032 तक गरीबी दूर करने की योजना तय की गई थी।

  • इस डॉक्यूमेंट में कहा गया था कि गरीबी दूर करने हेतु तीन चरणों में काम करना होगा

  1. गरीबों की गणना – देश में गरीबों की सही संख्या का पता लगाया जाए।

  2. गरीबी उन्मूलन संबंधी योजनाएँ लाई जाएँ।

  3. लागू की जाने वाली योजनाओं की मॉनीटरिंग या निरीक्षण किया जाए।

पिछले कुछ सालों में भारत में गरीबी दूर करने की दिशा में अच्छा प्रयास किया गया है। पिछले आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 22 प्रतिशत भारतीय गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। भारत ने समृद्ध शहरों और गरीब गाँवों की अर्थव्यवस्था बनाई है जिससे शहरी क्षेत्रों में वृद्धि और ग्रामीण क्षेत्रों में गिरावट आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का लक्ष्य गरीबी दूर करना नहीं बल्कि समृद्धि लाना होना चाहिये क्योंकि समृद्धि से ही गरीबी उन्मूलन संभव है। आर्थिक वृद्धि को ध्यान में रख कर सरकार द्वारा अनेक योजनाओं एवं कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जैसे रोज़गार सृजन कार्यक्रम, आय समर्थन कार्यक्रम, रोज़गार गारंटी तथा आवास योजना आदि।

क्या किये जाने की ज़रूरत है?

  • किसी भी गरीबी उन्मूलन रणनीति का एक आवश्यक तत्त्व घरेलू आय में बड़ी गिरावट को रोकना है।

  • राज्य प्रायोजित गरीबी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को सही सोच के साथ लागू किया जाना चाहिये।

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा पर अधिक निवेश किये जाने की ज़रूरत है ताकि मानव उत्पादकता में वृद्धि हो सके। गुणात्मक शिक्षा, कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही रोज़गार के अवसर, महिलाओं की भागीदारी, बुनियादी ढाँचा तथा सार्वजनिक निवेश पर ध्यान दिये जाने की ज़रूरत है।

शुभ लाभ NGO इस दिशा मे सतत कार्यरत है । हम कई माध्यमों से गरीबी से जूझती हुई जनता के कल्याण के लिए प्रयासरत है जिसमे कौशल विकास पर विशेष ध्यान है । आपका सहयोग इस लक्ष्य को प्राप्त करने मे हमारी मदद करेगा । कृपया आप अपनी सहयोग राशि का अनुदान करें ।